महाराष्ट्र का सिंहस्थ कुंभ भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक : श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी ने कहा कि महाराष्ट्र में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर और नासिक में गोदावरी नदी के तट पर लगने वाला कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां स्नान करने से आत्मा पवित्र होती है और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।

उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर और नासिक को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है क्योंकि यह भूमि त्रिदेवों की तपस्थली मानी जाती है। कुंभ मेला भारत की समावेशी सांस्कृतिक भावना को दर्शाता है, जहां लोग जाति, वर्ग और विचारधारा से ऊपर उठकर एक साथ आस्था की डुबकी लगाते हैं। साधु-संतों के शाही स्नान और विशाल संत समागम को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि महाराष्ट्र में जुलाई-अगस्त 2027 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह आयोजन धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करता है। स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और छोटे कारोबारियों को इससे बड़ा लाभ मिलता है।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुंभ मेला भारत की एकता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है। अंत में उन्होंने माँ मनसा देवी से सभी के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए “हर हर महादेव” का उद्घोष किया।

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