एक पहल, कई उम्मीदें: ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ने रोशन को दी नई व्यावसायिक दिशा

*हरिद्वार 25 मई 2025* जनपद हरिद्वार के लक्सर विकासखंड स्थित अकोढ़ा कलां गांव की निवासी श्रीमती रोशन पत्नी संजीत, ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय में एक नई पहचान बना चुकी हैं । उनकी कहानी आर्थिक संघर्ष से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

पहले, रोशन देवी एक सूक्ष्म स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक की दुकान चलाती थीं, जिससे उन्हें प्रति माह ₹5,000 से ₹6,000 की आय होती थी । यह आय उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त थी, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। इसी बीच, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में, ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की टीम ने उनके व्यवसाय का अवलोकन किया और उनकी इलेक्ट्रॉनिक शॉप को आय का एकमात्र स्रोत पाया । टीम ने उन्हें बड़े स्तर पर व्यवसाय करने के लिए प्रोत्साहित किया और परियोजना से अंशदान के लिए आवेदन करने का सुझाव दिया ।

रोशन देवी “उजाला” स्वयं सहायता समूह की एक सक्रिय सदस्य हैं, जिसका गठन 29 नवंबर 2021 को हुआ था और यह “राधे” ग्राम संगठन तथा “आदर्श बहुउद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता” (CLF) से जुड़ा हुआ है । इस गतिविधि के लिए परियोजना से उन्हें ₹75,000 का अंशदान प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपनी स्वयं की बचत से ₹1,25,000 का अंशदान किया और ₹1,00,000 का बैंक ऋण भी प्राप्त किया । इस गतिविधि के लिए कुल ₹3,00,000 के निवेश से उन्होंने अपनी इलेक्ट्रॉनिक दुकान को बड़े स्तर पर विस्तारित किया ।

इस सहयोग से रोशन देवी ने अपनी दुकान में इलेक्ट्रॉनिक सामान की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल की है। अब उनकी मासिक आय बढ़कर ₹10,000 से ₹12,000 तक पहुंच गई है । रोशन देवी का कहना है कि परियोजना के सहयोग से वह अपने परिवार का भरण-पोषण अच्छे से कर पा रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं । उनकी यह सफलता साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकती हैं।

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