
हरिद्वार। रामानंद इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड मैनेजमेंट में ‘आयुर्वेद और आधुनिक जीवनशैली’ विषय पर एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शहर की जानी-मानी आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मनीषा दीक्षित उपस्थित रहीं। व्याख्यान में छात्रों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आयुर्वेद के महत्व को समझा।
डॉ. मनीषा दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारियों के उपचार की पद्धति नहीं है, बल्कि यह एक संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की कला भी है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और फास्ट फूड संस्कृति को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘दिनचर्या’, ‘ऋतुचर्या’ और ‘रात्रिचर्या’ जैसे आयुर्वेदिक सिद्धांतों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या को प्रकृति के अनुसार ढाल ले, तो कई बीमारियों से स्वतः बचाव संभव है।
डॉ. दीक्षित ने यह भी बताया कि हमारी रसोई में मौजूद हल्दी, अदरक, तुलसी जैसे सामान्य पदार्थ औषधि का कार्य करते हैं और इनके नियमित उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने छात्रों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने और दवाइयों पर निर्भरता कम करने का संदेश दिया।
संस्थान के चेयरमैन श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आयुर्वेद हमें प्रकृति से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर डॉ. मयंक गुप्ता, मनुज उनियाल, सूरज राजपूत, कुसुम लता सहित समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
