काशी में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की बैठक,श्री महंत रविंद्र पुरी बने सचिव

वाराणसी, काशी। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की एक महत्वपूर्ण बैठक काशी के शिवाला घाट स्थित अष्ट कौशल में संपन्न हुई। बैठक में अखाड़े के वरिष्ठ संतों एवं महंतों की उपस्थिति में कई अहम निर्णय लिए गए। इस अवसर पर हरिद्वार के सचिव श्री महंत रविंद्रपुरी जी, श्री महंत राम रतन गिरी जी, श्रवण नाथ मठ के सचिव श्री महंत राज गिरी, प्रयागराज स्थान के सचिव श्री महंत नीलकंठ गिरी जी, श्री महंत रामसेवक गिरी जी, माउंट आबू गुरु शिखर राजस्थान के सचिव श्री महंत राकेश गिरी जी, भीड़भंजन हनुमान मंदिर गुजरात के श्री महंत दिनेश गिरी जी और महाराष्ट्र त्र्यंबकेश्वर के सचिव के रूप में श्री महंत दिनेश गिरी जी की नियुक्ति की गई।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अखाड़े की धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावशाली बनाया जाएगा। साथ ही, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्यों में संत समाज की भागीदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

संत समाज की एकता पर जोर

बैठक में सभी संतों ने अखाड़े की मर्यादा एवं गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। श्री महंत रविंद्र पुरी जी ने कहा कि संत समाज को संगठित होकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखाड़े की परंपरा एवं नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने नव नियुक्त सचिवों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें।

धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय

बैठक में आने वाले समय में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई। आगामी कुंभ मेले में अखाड़े की भूमिका पर चर्चा की गई और इसके सफल आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, धर्मशालाओं, आश्रमों और मंदिरों के रखरखाव को लेकर भी निर्णय लिए गए।

संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रचार पर जोर

बैठक में निर्णय लिया गया कि सनातन धर्म की शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे। संत समाज के माध्यम से युवा पीढ़ी को आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बैठक के समापन पर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के नवनियुक्त सचिव श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज ने सभी संतों को धन्यवाद दिया और कहा कि अखाड़े की गरिमा को बनाए रखने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने संत समाज से अनुरोध किया कि वे धर्म और समाज की सेवा में निरंतर सक्रिय रहें और सनातन संस्कृति को और मजबूत करें।

समाज को मिलेगा आध्यात्मिक लाभ

इस बैठक में लिए गए निर्णयों से सनातन धर्म के अनुयायियों को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा और अखाड़े की गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। बैठक में उपस्थित सभी संतों ने अखाड़े की उन्नति के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।

बैठक के दौरान विभिन्न संतों एवं महंतों की गरिमामयी उपस्थिति रही और सभी ने संत समाज की एकता एवं धर्म रक्षा पर जोर दिया।

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