
हरिद्वार। रविवार को अलकनंदा घाट पर भारतीय किसान यूनियन (नैन) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के समापन पर किसानों की विभिन्न समस्याओं और 14 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। अलकनंदा घाट पर आयोजित शिविर की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जोगेंद्र घासीराम नैन ने की। शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जोगेंद्र घासीराम नैन ने कहा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सी-2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने, कृषि ऋण माफ करने, राष्ट्रीय किसान क्षतिपूर्ति निगम बनाने, किसान आयोग के गठन तथा हरिद्वार में किसान भवन निर्माण की मांग की गई। इसके अलावा कृषि को उद्योग का दर्जा देने, उसके लिए पृथक बजट निर्धारित करने तथा फसल बीमा योजना समाप्त कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।
किसान यूनियन ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को निरस्त करने, बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, ग्रामीण घरेलू बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराने तथा हाईटेंशन लाइन टावरों के मुआवजे में वृद्धि की मांग की। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण के लिए दो-तिहाई किसानों की सहमति अनिवार्य करने, मनरेगा को कृषि कार्यों से जोड़ने, नकली खाद-बीज बेचने वालों पर कठोर कार्रवाई तथा कृषि सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में भेजने की मांग भी शामिल रही।
प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राजपूत ने कहा कि देश का किसान आज भी अपनी उपज का उचित मूल्य, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन देशव्यापी जनजागरण अभियान और आंदोलन चलाने को बाध्य होगा।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राजपूत, हरिद्वार जिला उपाध्यक्ष कुलदीप शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप गिरी, राकेश चौहान, वाजिद, गुणी यादव, रेशभ, श्याम सिंह, पवन, देहरादून जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम गैरोला, उत्तराखंड प्रभारी सुरेश चिल्लर, प्रदेश प्रवक्ता रूपेश कुमार, बंगाल एवं दिल्ली अध्यक्ष कालूराम जयपुरिया, झारखंड अध्यक्ष उर्मिला शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
