
*वर्तमान पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सनातन परंपराओं का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है: डॉ युधिष्ठिर लाल*
*श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, सद्भाव और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी है: डॉ युधिष्ठिर लाल*
हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर मार्ग स्थित संत शदाणी देवस्थानम् में मंगलवार को तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारम्भ गंगा पूजन के साथ हुआ। कथा के आरम्भ अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की तथा भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्ति भाव प्रकट किया।
कथा प्रारम्भ होने से पूर्व संत शदाणी घाट पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गंगा स्नान किया और गंगा पूजन कर विश्व कल्याण की कामना की। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
संत शदाणी देवस्थानम् के नवम पीठाधीश्वर संत डॉ. युधिष्ठिर लाल ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सनातन परंपराओं का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, सद्भाव और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी है।
संत डॉ. युधिष्ठिर लाल ने बताया कि 17 जून को विश्व शांति, लोक कल्याण एवं मानवता के मंगल के लिए विशेष यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। यज्ञ में भारत की उन्नति, राष्ट्र की समृद्धि और सभी नागरिकों के सुख-समृद्ध जीवन की कामना की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय सुखी, स्वस्थ और खुशहाल रहें तथा समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बना रहे, यही आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ पहुंचे हैं। कथा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्त आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं तथा सनातन संस्कृति के प्रति अपनी आस्था को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।
