देश के प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सानिध्य में भी हरिद्वार में सुरक्षित कुंभ मेले का आयोजन होगा:श्री महंत रविंद्र पुरी

*कुंभ का आयोजन करना, अखाड़ों का कार्य होता है*

*हरिद्वार में 2027 अर्द्धकुंभ मेले का पूर्ण कुंभ की तर्ज पर ही दिव्य और भव्य आयोजन कराया जाएगा*

*किसी भी अखाड़े को हरिद्वार में पूर्ण कुंभ के आयोजन पर कोई आपत्ति नहीं:श्री महंत रविंद्र पुरी*

हरिद्वार, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि कुंभ का विरोध करने वाले सनातन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने भारत साधु समाज से जुड़े साधु संतों के बयान का पलटवार किया और यह भी कहा कि हरिद्वार में 2027 अर्द्धकुंभ मेले का पूर्ण कुंभ की तर्ज पर ही दिव्य और भव्य आयोजन कराया जाएगा। देश के प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सानिध्य में भी हरिद्वार में सुरक्षित कुंभ मेले का आयोजन होगा। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि कुंभ का आयोजन करना, अखाड़ों का कार्य होता है। इसलिए सरकार ने अर्द्धकुंभ को पूर्णकुंभ की तर्ज पर आयोजित करने से पहले सभी अखाड़ों से पूछा भी था। सभी तेरह अखाड़ों ने इस पर सहमति भी जताई थी। खुद प्रयागराज कुंभ में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी को लेकर साधु संतों के साथ बैठक की थी, तभी उन्होंने हरिद्वार भव्य कुंभ मेला आयोजित करने की घोषणा की थी। अगर सरकार की इच्छा है तो सभी अखाड़ों के साधु संत भी सरकार के फैसले के साथ हैं।

उन्होंने कहा कि सभी अखाड़े 2027 कुंभ मेले की तैयारी में जुटे हैं। बहुत जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ बैठक होने वाली है। उस बैठक में सभी अखाड़ों के दो दो सचिव बुलाए जाएंगे। उस बैठक के बाद कुंभ की तैयारियां जोर पकड़ेंगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अखाड़ों के साधु संत ही कुंभ के आयोजन के कार्य देखते हैं, इसलिए किसी को भी कुंभ का विरोध करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कुंभ का विरोध करने वाले सिर्फ धार्मिक आयोजन का ही विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि सनातन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रयागराज के भव्य कुंभ में सत्तर करोड़ श्रद्धालु आए थे, इसलिए हरिद्वार कुंभ में भी करीब पचास करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इस बार हरिद्वार अर्द्धकुंभ के समय पर उज्जैन कुंभ नहीं है, इसमें एक साल का अंतर है। किसी भी अखाड़े को हरिद्वार में पूर्ण कुंभ के आयोजन पर कोई आपत्ति नहीं है। सभी अखाड़े इस आयोजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेंगे।

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