मनसा देवी मंदिर में बदले पूजा पाठ के नियम, श्रद्धालुओं को स्पर्श नहीं करेंगे पुजारी, चढ़े हुए नारियल होंगे रिसाइकल 

हरिद्वार। हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर में पूजा पाठ और प्रसाद चढ़ावे के नियमों में बदलाव किया गया है। यहां आने वाली महिला श्रद्धालुओं को कोई भी श्रद्धालु स्पर्श नहीं कर सकेगा। आशीर्वाद देने के बहाने स्पर्श करने वाले पुजारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। उनका कहना है कि मंदिर का कोई भी पुजारी महिला श्रद्धालुओं या अन्य भक्तों को आशीर्वाद देने के नाम पर स्पर्श नहीं करेगा। यदि इस तरह की कोई शिकायत सामने आती है तो संबंधित पुजारी को तत्काल मंदिर सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कोई भी मंदिर में चढ़ाया गया नारियल, फूल या अन्य प्रसाद, दोबारा नहीं चढ़ सकेगा। नारियल को मंदिर परिसर में ही रिसाइकल किया जाएगा।

रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अक्सर देश के कुछ मंदिरों में पुजारियों द्वारा महिलाओं को स्पर्श करने की शिकायत आती रहती हैं, जो कि निंदनीय है। मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का अनुचित आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है और सभी पुजारियों को मर्यादित व्यवहार के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मनसा देवी मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले प्रत्येक भक्त को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का पालन सभी के लिए अनिवार्य होगा। किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि मंदिर आने वाले भक्तों की आस्था मां मनसा देवी में है, न कि पुजारी में। इसलिए जो भी श्रद्धालु मंदिर आएगा, पुजारी उससे प्रसाद लेंगे और मां भगवती को चढ़ाकर वापस कर देंगे। स्पर्श करने की बजाय केवल टीका लगाया जाएगा।

नारियल भी होंगे रिसाइकिल

श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने मंदिर में चढ़ाए जाने वाले नारियलों के बेहतर प्रबंधन के लिए उन्हें रिसाइकिल करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु नारियल अर्पित करते हैं। ऐसे में उनका व्यवस्थित उपयोग होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग मंदिर में चढ़ाए गए नारियल को फिर से बेच देते हैं और बार बार वही नारियल मंदिर में चढ़ाया जाता है। इसी प्रकार फूलों का चक्र भी चलता है। उन्होंने कमेटी बनाई है और निर्देश दिए हैं कि मंदिर में चढ़ाए गए किसी भी प्रसाद की दोबारा बेचा न जाये। जो प्रसाद एक बाद चढ़ गया, उसे दोबारा चढ़ाना, आस्था के खिलाफ है। इन सब पर रोक लगाने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं।

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