इतिहास का पुनर्लेखन है समय की मांग*: प्रोफेसर बत्रा 

हरिद्वार/राजीव कुमार

महाविद्यालय में आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्मतिथि पर उन्हें भावपूर्ण रूप से स्मरण किया गया। भगवान बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष में महाविद्यालय में नवनिर्मित स्मार्ट कक्षा में एक बौद्धिक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि भारत के जनजातीय क्षेत्र का इतिहास समृद्ध परंपरा से ओतप्रोत है। और आवश्यकता इस बात की है कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे जननायकों को इतिहास के पुनर्लेखन के माध्यम से इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान दिया जाए। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन चरित्र और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका नारा ‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ आज भी जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणा स्रोत है उन्होंने सामाजिक और आर्थिक सुधारो के लिए भगवान बिरसा मुंडा की योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि वास्तव में वह एक महान समाज सुधारक भी थे उन्होंने युवाओं को नशा आदि कुरीतियों से दूर रहने के लिए भी प्रेरित किया था।

इस अवसर पर बोलते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉक्टर संजय कुमार माहेश्वरी ने विस्तार से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन चरित्र और उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल 25 वर्ष में बलिदान की ऐसी मिसाल पूरे स्वतंत्रता आंदोलन में मिलना दुर्लभ है साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि हम भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलकर ही युवाओं को नैतिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकते हैं और उनमें देश प्रेम की भावना का प्रसार कर सकते हैं।

कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के तौर पर बोलते हुए राजनीति विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष विनय थपलियाल ने पूरे विश्व के जनजातीय आंदोलन की तुलना भारतीय उपमहाद्वीप में चलने वाले जनजाति आंदोलन से की और कहा कि भारतीय जनजाति आंदोलन में केवल औपनिवेशिक शक्तियों के विरुद्ध थे बल्कि जल जंगल और जमीन के संसाधनों को आदिवासी लोगों को मुहैया कराने के पक्षधर भी थे उन्होंने छोटा नागपुर टेनेसी एक्ट 1908 का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक्ट भगवान बिरसा मुंडा की शहादत के बिना संभव नहीं था।

इस अवसर पर समाजशास्त्र विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर जैसी आर्य भी मौजूद थे उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज की मुख्य धारा से वंचित समूहों में सामाजिक चेतना का प्रसार किया और उनका योगदान अविस्मरणीय है।

इस अवसर पर डॉ विनीत चौहान, दिव्यांश शर्मा, मीनाक्षी शर्मा , पल्लवी राणा, डॉक्टर आशा शर्मा डॉक्टर लता शर्मा डॉ अनुरिसा, डॉ पूर्णिमा सुंदरियाल, साक्षी, भव्या, आकांक्षा, डॉ विजय शर्मा ,डॉक्टर यादवेंद्र सिंह भी उपस्थित थे ।

  • Related Posts

    अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी ने किया गुजरात से आए महामंडलेश्वर स्वामी कुर्षी पुरी और भक्तों का स्वागत

    हरिद्वार, नासिक और उज्जैन कुंभ में वाल्मीकि अखाड़ा के संत समाज के साथ स्नान की घोषणा की सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव का कोई स्थान नहीं-श्रीमहंत रविंद्रपुरी गंगा किसी से…

    राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उत्कृष्ट बुनकर और शिल्पकार सम्मानित, स्थानीय उत्पाद अपनाने का आह्वान

    देहरादून। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। इस…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी ने किया गुजरात से आए महामंडलेश्वर स्वामी कुर्षी पुरी और भक्तों का स्वागत

    • By Admin
    • August 8, 2026
    • 3 views

    राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उत्कृष्ट बुनकर और शिल्पकार सम्मानित, स्थानीय उत्पाद अपनाने का आह्वान

    • By Admin
    • August 7, 2026
    • 5 views

    कांवड़ियों की सेवा से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव : स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती

    • By Admin
    • August 7, 2026
    • 10 views

    कांवड़ मेले की सफलता के लिए मां मनसा देवी से प्रार्थना, संत सम्मेलन में सनातन की एकता पर मंथन

    • By Admin
    • August 7, 2026
    • 9 views

    रेखा आर्या ने श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी से लिया आशीर्वाद, ओलंपिक संकल्प कांवड़ यात्रा को मिला संतों का समर्थन

    • By Admin
    • August 6, 2026
    • 7 views

    भगवा वस्त्रों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, सांसद माफी मांगें : श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज

    • By Admin
    • August 2, 2026
    • 8 views