जापानी आध्यात्मिक गुरु बालाकुंभ गुरु मुनि (ताकायुकि) ने लिया अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी का आशीर्वाद

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पुरी बोले बालाकुंभ गुरु मुनि (ताकायुकि) को बनाया जाएगा महामंडलेश्वर

हरिद्वार, 23 जुलाई: जापान से आध्यात्मिक भ्रमण पर भारत आए प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु बालाकुंभ गुरु मुनि (ताकायुकि) ने बुधवार को श्री मनसा देवी चरण पादुका मंदिर परिसर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज से भेंट की और आशीर्वाद प्राप्त किया। उनके साथ जापान से आए उनके अनुयायियों का एक दल भी मौजूद था।

इस अवसर पर श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने जापानी गुरु और उनके शिष्यों को मनसा देवी की पवित्र चुनरी भेंट कर उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बालाकुंभ गुरु मुनि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जल्दी ही बालाकुंभ गुरु मुनि (ताकायुकि) को पंचायती अखाड़ा निरंजनी का महामंडलेश्वर पद प्रदान किया जाएगा।

श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा, “हम सभी देशों से प्रेम करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है। ऐसे में जापानी गुरु का भारत से जुड़ाव, हमारी परंपराओं की सार्वभौमिकता का प्रतीक है।”

इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज देश ओर दुनिया में अखाड़े की परंपराओं के साथ साथ सनातन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं संतों का समूचा जीवन देश ओर धर्म को समर्पित रहता हैं और महाराजश्री सनातन को सुदृढ़ करने के लिए आगे बढ़चढ कर सनातन धर्म को आगे बढ़ा रहे हैं।

निरंजनी अखाड़ा के श्रीमहंत दर्शन दर्शन भारती ने कहा कि ऐसे गुरु, जो भारत की संस्कृति को विदेशों में पहुंचा रहे हैं, वे वास्तव में धर्मदूत हैं।

इस दौरान बालाकुंभ गुरु मुनि (ताकायुकि) ने कहा कि वे अब तक 100 बार भारत आ चुके हैं और इस बार एक माह के प्रवास पर आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं जापान में प्रतिदिन यज्ञ करता हूं, जिससे भारत और जापान दोनों की खुशहाली बनी रहे। मैंने जापान में भगवान शिव का एक मंदिर भी बनाया है और अब उत्तराखंड में भी शिव मंदिर बनाने की योजना है।”

उन्होंने आगे बताया कि वे जापान में अपने शिष्यों को सनातन धर्म की शिक्षाएं देते हैं और भगवान शिव के महत्व को समझाते हैं। उनका उद्देश्य है कि दुनिया भर में सनातन धर्म की दिव्यता और वैज्ञानिकता को पहुंचाया जाए।

यह मुलाकात दोनों देशों की आध्यात्मिक एकता और सनातन धर्म के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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