स्वामी ब्रह्म योगानंद महाराज ने विश्व कल्याण के लिए की चारधाम यात्रा, कहा – “सनातन धर्म के पुनर्जागरण से बनेगा भारत विश्व गुरु”

हरिद्वार।

विश्व कल्याण और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से स्वामी दयानंद सरस्वती ऋषिकेश के शिष्य, प्रसिद्ध योग गुरु और राष्ट्रवादी चिंतक स्वामी ब्रह्म योगानंद महाराज ने चारधाम यात्रा की है। यह यात्रा भारतीय संस्कृति, धर्म और अखंडता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।

पिछले 50 वर्षों से युवाओं को योग, वेद और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में सक्रिय स्वामी ब्रह्म योगानंद महाराज इस यात्रा के माध्यम से देशवासियों को आत्मबोध, राष्ट्रबोध और धर्मबोध का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वे एक विशेष योग प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेंगे, जिसमें योग के माध्यम से जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और शांति के महत्व पर बल दिया जाएगा।

स्वामी जी ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “ऑपरेशन सिंदूर” के माध्यम से पाकिस्तान को करारा जवाब दिया और राष्ट्र की गरिमा को सुरक्षित रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री की दृढ़ नीतियों की सराहना करते हुए कहा, “मोदी हैं तो सनातन जीवित है।” उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भारत एक हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक पुनरुत्थान के क्षेत्र में भी स्वामी ब्रह्म योगानंद महाराज का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने तमिलनाडु के कांचीपुरम के पास भारत माता मंदिर और उज्जैन की तर्ज पर महादेव का एक भव्य मंदिर की स्थापना की है। इसके अलावा वे 27 गांवों में मंदिरों के निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागरूकता का प्रसार हो रहा है।

स्वामी जी ने जम्मू-कश्मीर में स्थित प्राचीन मां सरस्वती मंदिर के जीर्णोद्धार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों का पुनर्निर्माण भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक है।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि “समय की शैली दिन से प्रारंभ होनी चाहिए,” यानी हमें समय का सदुपयोग करते हुए दिनचर्या में अनुशासन लाना होगा। ऐसा करके ही भारत एक बार फिर विश्व गुरु की भूमिका निभा सकता है।

स्वामी ब्रह्म योगानंद महाराज ने यह भी कहा कि सिंधु भारत से पुनः जुड़ेगा और अखंड भारत का निर्माण होगा। उन्होंने भारत की प्राचीन सीमाओं को पुनः प्राप्त करने की बात करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक लक्ष्य है।

चारधाम यात्रा के माध्यम से स्वामी जी देशवासियों को यह स्मरण कराना चाहते हैं कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक परंपरा में निहित है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे योग, वेद और सनातन परंपरा को आत्मसात कर भारत को पुनः एक महान और अखंड राष्ट्र बनाने में सहयोग करें।

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