शदाणी देवस्थानम् पहुँचा पाक से 270 हिंदू तीर्थ यात्रियों का जत्था, हरिद्वार में हुआ भव्य स्वागत

हरिद्वार, 10 अप्रैल – पाकिस्तान के सिंध प्रांत से 270 हिंदू तीर्थयात्रियों का एक विशेष जत्था सप्त सरोवर मार्ग स्थित 300 वर्ष प्राचीन संत शदाणी देवस्थानम् पहुँचा, जहाँ ढोल-नगाड़ों, शहनाई और फूल मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। यह जत्था शदाणी पीठ के सातवें संत राजाराम साहिब के वार्षिक महोत्सव में भाग लेने भारत पहुँचा है।

पाक हिन्दू श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान ओर पूजन कर संत शदाणी घाट पर विश्व शांति के लिए यज्ञ किया।

तीर्थयात्रियों ने भारत के कई प्रमुख तीर्थ स्थलों – रायपुर (छत्तीसगढ़), द्वारका पीठ (गुजरात), माउंट आबू (राजस्थान) के दर्शन करने के बाद अब हरिद्वार में गंगा माँ की गोद में पहुँचने का अनुभव साझा किया। जत्थे के ग्रुप लीडर मनोज कुमार, राज कुमार तलरेजा और संतोष कुमार ने भावुक होकर कहा कि वर्षों से माँ गंगा के दर्शन की कामना थी, जो आज पूरी हुई। वे अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु पिंड तर्पण और धार्मिक पूजा-अर्चना करेंगे।

तीर्थयात्रियों ने शदाणी दरबार के वर्तमान पीठाधीश्वर संत युधिष्ठिर लाल महाराज का विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से यह यात्रा संभव हो पाई। शदाणी दरबार के सेवादार अमर लाल ने जानकारी दी कि तीन दिवसीय इस यात्रा में विभिन्न धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं।

10 अप्रैल को तीर्थयात्री संत शदाणी गंगा घाट पर गंगा पूजन, हवन-यज्ञ और हर की पौड़ी पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में भाग लेंगे। 11 अप्रैल को सुबह 11 बजे शदाणी देवस्थानम् में 1008 शिवलिंग निर्माण का भव्य आयोजन होगा, जिसमें हरिद्वार के संतगण व विशिष्ट अतिथि भाग लेंगे। वहीं शाम 4 बजे महिलाएं कलश यात्रा निकालेंगी जो भारत माता मंदिर होते हुए शदाणी गंगा घाट पहुँचेगी, जहाँ दीपदान और माँ गंगा की आरती की जाएगी।

12 अप्रैल को यह जत्था पतंजलि योगपीठ व कंखल स्थित प्रमुख मंदिरों का दर्शन कर धार्मिक ऊर्जा से अभिभूत होकर अमृतसर के लिए रवाना होगा। इस यात्रा का उद्देश्य ना केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखना है, बल्कि भारत-पाक के सांस्कृतिक रिश्तों को भी नई मजबूती देना है।

तीर्थयात्रियों की उपस्थिति हरिद्वार की धरती पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रही है। गंगा तट पर उमड़ा यह उत्साह, श्रद्धा और संस्कृति का संगम बन गया है। शांति, समरसता और श्रद्धा का यह उत्सव एक सकारात्मक संदेश दे रहा है कि आस्था सीमाओं से परे होती है।

राजकुमार,राजेश कुमार,आशा कुमारी, नारायण, रामी बाई, ताराचंद, धनेश कुमार, दीपक कुमार,पुष्पा बाई ,चेतन कुमार, अनीता बाई, पूनम बाई, तनीषा कुमारी, सीताबाई ,चेतन माल, जया कुमारी, तानिया,श्यामलाल शर्मा नरेश कुमार सोनिया अशोक कुमार अरुण कुमार करण कुमार विकास कुमार निर्मल दास तुलसीदास विनोद कुमार चंदाबाई मंगला शर्मा कविता कुमारी कैलाश कुमार आदि मौजूद रहे

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