
कन्याओं के चरण धोकर चुनरी ओढ़ाई, उपहार और दक्षिणा भेंट की; नारी सम्मान और सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
कन्या पूजन नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक: श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी
हरिद्वार। शारदीय नवरात्र की नवमी पर श्रवणनाथ मठ का वार्षिकोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। मठ स्थित गंगा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कन्या पूजन किया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कन्याओं के चरण धोकर पूजन किया और चुनरी ओढ़ाकर उपहार व दक्षिणा भेंट की। उन्होंने कन्याओं का आशीर्वाद लेकर मां भगवती से देश-प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान संत-महात्माओं ने कन्या पूजन को नारी शक्ति के सम्मान और सनातन संस्कृति के संस्कारों से जोड़ते हुए बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देने का आह्वान किया।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि सनातन धर्म में कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप माना गया है। नवरात्र में कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि बेटियां समाज की आधारशिला हैं। उनके सम्मान, शिक्षा और सुरक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां भगवती की आराधना शक्ति, साहस, करुणा और सकारात्मकता का संदेश देती है। नवरात्र आत्मशुद्धि, साधना और सेवा का पर्व है। धार्मिक परंपराओं की सार्थकता तभी है, जब उनके संस्कारों को व्यवहार में उतारकर समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत किया जाए।
निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरि ने कहा कि कन्या पूजन सनातन धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा है। यह आयोजन मां भगवती के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के साथ समाज को नारी सम्मान और सेवा का संदेश देता है। संत समाज धर्म, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए सदैव प्रेरित करता रहा है।
श्रीमहंत दर्शन भारती और महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि मां दुर्गा की आराधना से शक्ति, भक्ति और आत्मविश्वास का संचार होता है। धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और सभी के प्रति सद्भाव रखने में निहित है।
महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। धार्मिक पर्व और अनुष्ठान सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। पूजा-अर्चना की सार्थकता तभी है, जब उससे मिलने वाली प्रेरणा को अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में अपनाया जाए।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने विजयादशमी के पर्व पर देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह पर्व सत्य, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि समाज से वैमनस्य और भेदभाव दूर कर आपसी प्रेम, सहयोग और सद्भाव को बढ़ावा देना आवश्यक है। श्रवणनाथ मठ में कन्या पूजन और वार्षिकोत्सव के अवसर पर हुए धार्मिक अनुष्ठान में मां भगवती से देश-प्रदेश के कल्याण और जनमानस की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई।
