स्वामी कामेश्वर पुरी ने राम मंदिर में चोरी प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी कामेश्वर पुरी ने राम मंदिर में हुई कथित चोरी की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात बताया है। उन्होंने कहा कि जिस पावन धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और मेहनत की कमाई प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित करते हैं, वहां इस प्रकार की घटना होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

स्वामी कामेश्वर पुरी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद यह घटना कैसे हुई। यदि यह सुरक्षा व्यवस्था की विफलता है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि इसमें किसी की मिलीभगत सामने आती है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक आस्था और मंदिर की संपत्ति पर गलत नजर डालने का साहस न कर सके।

उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की गरिमा उसकी पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भावना से बनी रहती है। यदि मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोग स्वयं को जवाबदेही से ऊपर समझने लगेंगे तो यह धार्मिक संस्थाओं के लिए चिंता का विषय है। श्रीराम का मंदिर किसी व्यक्ति या संस्था की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था का केंद्र है, जिसकी मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

स्वामी कामेश्वर पुरी ने यह भी कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में अपना जीवन समर्पित करने वाले अनेक संत आज उपेक्षा का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को दर्शन की विशेष सुविधाएं मिल जाती हैं, जबकि वर्षों से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे संतों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था तक नहीं है। उन्होंने देशभर से आने वाले संतों के लिए अलग सहायता काउंटर और पृथक दर्शन-पंक्ति की व्यवस्था किए जाने की मांग की।

उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने, दोषियों को कठोर दंड देने तथा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा करने की मांग की। साथ ही ट्रस्ट में प्रतिष्ठित एवं तपस्वी संतों को उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास की परीक्षा है और समय रहते जवाबदेही तय कर व्यवस्था में सुधार किया जाना आवश्यक है।

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