
हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम के विशाल हॉल में आयोजित 1008 भक्तामर महामण्डल बीजाक्षर विधान (विश्व शांति महायज्ञ) के दौरान आज का दिन विशेष आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से परिपूर्ण रहा। परम पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी के सानिध्य में चल रहे इस आयोजन में उनके पूज्य गुरुदेव 108 आचार्य समयसागर जी महाराज का 46वां दीक्षा समारोह बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर आर्यिकाओं तथा जैन समाज के श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से विशेष पूजा-अर्चना कर अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भक्तामर विधान में बढ़-चढ़कर भाग लिया और विश्व शांति की कामना करते हुए धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न किए।
कार्यक्रम के दौरान पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को धर्म और आत्मचिंतन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में दुष्कर्म अंधकार लाते हैं, जबकि सत्कर्म जीवन को प्रकाशमय बना देते हैं। मनुष्य अक्सर सुख और दुख की वास्तविक परिभाषा को नहीं समझ पाता। यदि व्यक्ति अपने अंतरमन में विचरण करे और आत्मा का चिंतन करे, तो उसे ब्रह्म की प्राप्ति का मार्ग मिल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का मनुष्य बाहरी संसाधनों और भौतिक साधनों में उलझा हुआ है, जिसके कारण वह भ्रमजाल में फंस जाता है। आत्मकल्याण का मार्ग केवल आत्मचिंतन, संयम और सत्कर्म से ही संभव है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म, सदाचार और संयम को अपनाना चाहिए।
संध्याकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और युवाओं ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। नमन जैन, कु. वंशिका, कु. पलक, कु. पावनी, सिद्धि, कु. इशान्वी और मनस्वी सहित अन्य प्रतिभागियों ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
इस अवसर पर अर्चना जैन, रीतू जैन, पारूल जैन, पूजा जैन, पीयूष जैन, समर्थ जैन, मीडिया प्रभारी सतीश जैन, आदेश जैन, रजत जैन, संदीप जैन, नितेश जैन, रवि जैन, मनोज जैन और रूचिन जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी ने धर्म लाभ प्राप्त कर आयोजन की सराहना की और विश्व शांति की मंगलकामना की।
