देसंविवि व शांतिकुंज में पूरे उत्साह से हुआ ध्वजारोहण

हरिद्वार 27 जनवरी।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, गायत्री तीर्थ शांतिकुंज और गायत्री विद्यापीठ में पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय व गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में स्नेहसलिला श्रद्धेया शैलदीदी एवं युवा आइकॉन डॉ चिन्मय पण्ड्या ने वैदिक मंत्रोच्चारण व शंखनाद के बीच ध्वज फहराया और पूजन कर सलामी दी।

राष्ट्रीय गान के साथ विभिन्न कार्यक्रम भी हुए, जिसमें देशभक्ति से संबंधित विविध सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम था। विद्यार्थियों और शांतिकुंज कार्यकर्तओं ने ने मिलकर रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस अवसर पर स्नेहसलिला श्रद्धेया शैलदीदी और डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अपने संदेश में राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और समर्पण को बल देते हुए युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और संस्कार की अहम भूमिका पर जोर दिया।

देसंविवि के कुलाधिपति व अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने अपने संदेश में कहा कि हमारे देश की महानता और समृद्धि में प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए, जिससे वे राष्ट्र को समृद्ध व सशक्त बनाने में सक्रिय योगदान देंगे। शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के माध्यम से हम समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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देसंविवि और ग्रहफिटी मल्टीमीडिया के बीच समझौता

हरिद्वार 27 जनवरी।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय और मुंबई स्थित ग्रहफिटी मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच शैक्षणिक समझौता हुआ। इस अनुबंध में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं ग्रहफिटी मल्टीमीडिया संस्थान के सीईओ श्री मुझल बी. श्रॉफ ने हस्ताक्षर किया। यह साझेदारी तीन साल की अवधि तक चलेगी और इसमें एआई, नरेटिव एआई और मल्टीमीडिया के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

इसके अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान पहलुओं, शैक्षणिक कार्यक्रमों और तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर २डी और ३डी एनीमेशन परियोजनाओं के साथ-साथ उच्च-स्तरीय एआई अनुप्रयोगों पर काम करेंगे। इसका उद्देश्य अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संरक्षण भी शामिल होगा। इसके अलावा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भी यह समझौता काम करेगा, जो कि बहुत ही मूल्यवान कदम है।

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