संत राजाराम साहिब की प्रतिमा का हुआ अनावरण 

उत्तरी हरिद्वार स्थित संत शदाणी देवस्थानम में चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान नवम पीठाधीश्वर संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल ने संत राजाराम साहिब की प्रतिमा का अनावरण किया।

संत शदाणी देवस्थानम नवम पीठाधीश्वर संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल ने कहा कि संत राजाराम ने तब शदाणी दरबार में रहना शुरू किया और अपनी निस्वार्थ सेवा से माता साहिब को प्रसन्न किया। माता साहिब ने उन्हें धार्मिक प्रवचन और ज्ञान की शिक्षा दी और 1904 में उन्हें 2 साल के लिए हरिद्वार में धार्मिक शिक्षा केंद्र में भेजा गया, जहाँ उन्होंने संस्था के प्रमुख स्वामी चेतन देव से वेद, उपनिषद, व्याकरण और अन्य “ग्रंथों” की शिक्षा ली, जो बच्चे की संवेदनशीलता और असाधारण क्षमताओं से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें हरिद्वार में रहने और उनसे कार्यभार संभालने की पेशकश की। लेकिन संत राजाराम ने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया और कहा कि वह शदाणी दरबार के प्रति समर्पित हैं और वहाँ जाना पसंद करेंगे। संत राजाराम ने तब दरबार में रहना शुरू किया और अपनी निस्वार्थ सेवा से माता साहिब को प्रसन्न किया। माता साहिब ने उन्हें धार्मिक प्रवचन और ज्ञान की शिक्षा दी। संत राजाराम भगवान शिव के अवतार थे। उनका व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक था। उन्होंने गीता, ग्रंथ और वेदांत मनोविज्ञान को कंठस्थ किया और स्वयं एक प्रबुद्ध आत्मा थे। वे इतने दयालु थे कि वे दूसरों का दुख सहन नहीं कर सकते थे। सन् 1932 में संत राजाराम साहिब ने शदाणी दरबार की गद्दी संभाली। एक बार घोटकी के भाई गंगूराम, जो शदाणी दरबार के एक शिष्य थे, अपने भतीजे नामदेव के कैंसर से पीड़ित होने के कारण बहुत दुखी थे। बीमार बच्चे को शदाणी दरबार में लाया गया और भाई गंगूराम ने संत राजाराम से उसे ठीक करने की विनती की। संत ने सहानुभूति से भरकर सुझाव दिया कि नामदेव के शरीर पर “धूनी साहिब” रगड़ी जाए। परिणाम यह हुआ कि नामदेव ठीक हो गए और आज भी सिंध में जीवित हैं। शदाणी संतों ने हमेशा हिंदुओं और मुसलमानों के विभिन्न संप्रदायों के बीच भाईचारा बनाए रखने की कोशिश की है। यही कारण है कि आज भी सैकड़ों मुसलमान भी इस दरबार के अनुयायी हैं। वे शदाणी संतों का सम्मान करते हैं और आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए मुसलमानों के दरबार में आने के कई उदाहरण हैं। संत राजाराम 20 मार्च, 1960 को स्वर्ग सिधार गए।

  • Related Posts

    सनातन संस्कृति के प्रसार और गंगा स्वच्छता के संकल्प के साथ निकलेगी दंडवत यात्रा: करौली शंकर महाराज

    दक्षेश्वर महादेव मंदिर से हरकी पैड़ी तक दंडवत करते हुए पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु, कुंभ-2027 की भव्यता और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए करेंगे प्रार्थना 31 अक्टूबर को हरकी पैड़ी पर…

    बारिश में भी कुंभ तैयारियों का जायजा लेने पहुंचीं मेलाधिकारी सोनिका, बोलीं- भीड़ प्रबंधन हमारी प्राथमिकता

    करवाचौथ के दिन अवकाश के बीच भी किया स्थलीय निरीक्षण, पंतद्वीप से चंडी चौक तक व्यवस्थाएं परखीं, निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश हरिद्वार। आसमान से बरसती बारिश, करवाचौथ…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सनातन संस्कृति के प्रसार और गंगा स्वच्छता के संकल्प के साथ निकलेगी दंडवत यात्रा: करौली शंकर महाराज

    • By Admin
    • October 29, 2026
    • 3 views

    बारिश में भी कुंभ तैयारियों का जायजा लेने पहुंचीं मेलाधिकारी सोनिका, बोलीं- भीड़ प्रबंधन हमारी प्राथमिकता

    • By Admin
    • October 29, 2026
    • 8 views

    कुंभ-2027 के शाही स्नान में सहभागिता चाहते हैं गुरु रविदास साधु संप्रदाय के संत

    • By Admin
    • October 26, 2026
    • 6 views

    एआई पत्रकार का विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक: पीयूष पाण्डेय

    • By Admin
    • October 24, 2026
    • 8 views

    रोबोटिक्स के मॉडल से छात्रों ने दिखाई वैज्ञानिक सोच, विज्ञान प्रदर्शनी में दिखी प्रतिभा

    • By Admin
    • October 24, 2026
    • 8 views

    अमित शाह के जन्मदिन पर श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने दी शुभकामनाएं, मां मंशा देवी से की उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना

    • By Admin
    • October 22, 2026
    • 7 views