संतों ने मुख्यमंत्री को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं

मुख्यमंत्री आवास में संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति

देहरादून/हरिद्वार।

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में संत समाज ने पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज, निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व श्रीमनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि मौजूद रहे।

संतों ने मुख्यमंत्री को माता की चुनरी ओढ़ाकर और मां गंगा की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद दिया।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म और संस्कृति की धरती है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में धर्म और योग को नई पहचान मिल रही है। संत समाज प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए निरंतर प्रार्थना करता रहेगा।

स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। धार्मिक पर्यटन और जनकल्याण योजनाओं में तेजी आई है।

श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और तीर्थ विकास जैसे क्षेत्रों में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है।

स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली में सेवा और समर्पण का भाव झलकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतों का आभार जताते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद ही राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। सरकार “संपूर्ण विकास, सशक्त उत्तराखंड” के संकल्प पर पूरी मजबूती से काम कर रही है।

संत समाज ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए वे सरकार के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। संतों ने कहा कि कुम्भ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, जिसे ऐतिहासिक स्वरूप देना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री,पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण,प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी,चिंतक और लेखक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेकों प्रतिष्ठित संत-महात्मा एवं धर्माचार्य भेंट करने वाले प्रमुख संत मौजूद रहे।

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